धान खरीदी के अंतिम दिनों में धौराटीकरा केन्द्र पर अनियमितताओं का आरोप, किसानों से खुलेआम लूट का खेल

धान खरीदी के अंतिम दिनों में धौराटीकरा केन्द्र पर अनियमितताओं का आरोप, किसानों से खुलेआम लूट का खेल
कोरिया। धान खरीदी के लिए अब केवल चार दिन शेष बचे हैं, लेकिन कोरिया जिले के धौराटीकरा धान खरीदी केन्द्र में लगातार गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, धौराटीकरा केन्द्र में सेवा समाप्त किए जा चुके एक पूर्व कर्मचारी को दोबारा बैठाकर धान खरीदी का कार्य कराया जा रहा है। इस पूरे कार्य की जिम्मेदारी धौराटीकरा धान खरीदी प्रभारी देवसाय सिंह, जो कि लिपिक पद पर पदस्थ हैं, द्वारा निभाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ जिला प्रशासन की खुली आंखों के सामने हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि जिला अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी, जिला सहायक सहकारिता अधिकारी ही नहीं, बल्कि सहायक नोडल अधिकारी की मौजूदगी में भी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रति बोरी 40 किलो 700 ग्राम धान की खरीदी की जानी है। लेकिन धौराटीकरा समिति में बैठाया गया सेवा समाप्त कर्मचारी किसानों से प्रति बोरी 41 किलो 200 ग्राम धान ले रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि हर बोरी में लगभग 500 ग्राम अतिरिक्त धान किसानों से जबरन लिया जा रहा है। यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो एक किसान औसतन 100 से 200 बोरी धान लेकर केन्द्र पहुंचता है। ऐसे में एक किसान से ही 50 किलो से 100 किलो तक अतिरिक्त धान वसूला जा रहा है। इस तरह सैकड़ों किसानों से रोजाना क्विंटल के हिसाब से धान की अवैध वसूली की जा रही है। किसानों में इस लूट को लेकर भारी आक्रोश है, लेकिन केन्द्र पर मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के दबाव के चलते वे खुलकर विरोध करने से कतरा रहे हैं।
हमाली भुगतान को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शासन का दावा है कि हमाली की राशि पहले ही जारी कर दी गई है, लेकिन धौराटीकरा समिति के सहायक नोडल अधिकारी का कहना है कि कुछ किसान स्वयं हमाली की राशि दे रहे हैं और अंत में वही राशि हमालों को दी जाएगी। जबकि सूत्रों के अनुसार, प्रति सप्ताह हमाली की राशि बैंकों से नियमित रूप से आहरित की जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब राशि जारी और आहरित हो चुकी है, तो किसानों से अतिरिक्त पैसा क्यों लिया जा रहा है? हालांकि यह बातें सूत्रों पर आधारित हैं और प्रशासनिक स्तर पर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसानों से खुलेआम लूट की जा रही है। सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि जिला विपणन अधिकारी और सहायक सहकारिता अधिकारी कथित रूप से अपना हिस्सा लेकर पूरे मामले पर मौन स्वीकृति प्रदान कर चुके हैं। अब देखना यह होगा कि धान खरीदी समाप्त होने से पहले जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या फिर किसान इसी तरह शोषण का शिकार होते रहेंगे।















